मखाना बोर्ड के गठन से बदलेगी इसके किसानों की किस्मत
– तेजी से वैश्विक हुए सुपर फूड मखाने की खेती और कारोबार को अब मिलेगा और भी बढ़ावा
- लगभग 13,000 हेक्टेयर से बढ़कर 35,224 हेक्टेयर हुआ राज्य में मखाना की खेती का रकबा
- इसकी खेती में इस्तेमाल हो रहे हैं स्वर्ण वैदेही और सबौर मखाना-1 जैसे उन्नत किस्म के बीज
- देश का 85 प्रतिशत मखाना उत्पादन करता है बिहार
पटना, 21 सितंबर।
केंद्र सरकार ने मखाना बोर्ड के गठन की अधिसूचना जारी कर दी है। जिससे बिहार के करीब 5 लाख मखाना किसानों की किस्मत बदलने वाली है। बिहार देश का करीब 85 प्रतिशत मखाना उत्पादित करता है। इस बोर्ड के गठन से मखाना प्रोसेसिंग और व्यापार को बढ़ावा मिलेगा। जिसका सीधा लाभ बिहार को मिलने जा रहा है।
मखाना बोर्ड के गठन से किसानों की आय में बढ़ोतरी के साथ-साथ कारोबार और रोजगार के नये अवसर खुलेंगे। बिहार सरकार के प्रयासों से पिछले 12 वर्षों में मखाना उत्पादन का क्षेत्र विस्तार हुआ है और उत्पादकता में बढ़ोतरी आई है। 2019-20 में मखाना विकास योजना प्रारंभ की गई थी। जिसमें मखाना अनुसंधान केन्द्र, दरभंगा द्वारा विकसित स्वर्ण वैदेही तथा भोला पासवान शास्त्री, कृषि महाविद्यालय द्वारा विकसित सबौर मखाना-1 के बीज को बढ़ावा दिया गया।
बिहार सरकार मखाना विकास योजना के जरिए राज्य में मखाना की खेती को बढ़ावा दे रही है। इस योजना के तहत बिहार के 10 जिलों में मखाना के उत्पादन का विस्तार हुआ है। इसके साथ ही किसानों को अन्य वित्तीय सहायता भी दी जाती है, जैसे – मखाना संग्रहण के लिए भंडार गृह निर्माण पर अनुदान, बिहार एवं बिहार से बाहर व्यापक प्रचार-प्रसार के लिए मखाना महोत्सव का आयोजन आदि।
तीन गुना बढ़ा मखाना उत्पादन का रकबा
बिहार सरकार के प्रयासों से मखाना के उत्पादन में तेजी से बढ़ोत्तरी हुई है। पिछले 10 वर्षों में मखाना की खेती के रकबे में व्यापक बढ़ोतरी हुई है। वर्ष 2012 तक बिहार में मखाना की खेती लगभग 13,000 हेक्टेयर में होती थी। मुख्यमंत्री बागवानी मिशन योजना के अन्तर्गत मखाना का क्षेत्र विस्तार कार्यक्रम प्रारंभ किया गया है, जिससे मखाना की खेती का रकबा बढ़कर 35,224 हेक्टेयर हो गया है।
इन दस जिलों में होता है मखाना
राज्य के 10 जिलों दरभंगा, मधुबनी, कटिहार, अररिया, पूर्णियां, किशनगंज, सुपौल, मधेपुरा, सहरसा, और खगड़िया में मुख्य रूप से मखाना का उत्पादन होता है। इन जिलों में मखाना की खेती पर राज्य सरकार द्वारा विभिन्न तरह की सहायता दी जाती है। मखाना की वैश्विक स्तर पर मांग बढ़ने के बाद अब इसका उत्पादन कई अन्य जिलों में भी होने लगा है।
आय में हुई व्यापक बढ़ोत्तरी
बिहार में मछली पालन के साथ ही मखाना उत्पादन में भी तेजी से बढ़ोत्तरी होने का लाभ राज्य के राजस्व में बढ़ोत्तरी के रूप में भी सामने आया है। मखाना कृषकों की आय में कई गुना इजाफा हुआ है एवं उनके जीवन स्तर में सुधार आया है। आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2005 के पूर्व जहां मत्स्य/मखाना जलकरों से राजस्व प्राप्ति 3.83 करोड़ रुपये थी। वहीं 2023-24 में यह बढ़कर 17.52 करोड़ रुपये हो गई है। राजस्व प्राप्ति में 4.57 गुना की बढ़ोत्तरी हो चुकी है।
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