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  • जीएसटी सुधार 2025 : आत्मनिर्भर भारत की कर क्रांति
Written by AuthorSeptember 22, 2025

जीएसटी सुधार 2025 : आत्मनिर्भर भारत की कर क्रांति

Uncategorized Article

पीएम मोदी का देशवासियों को त्योहारों का उपहार

डॉ. प्रदीप कुमार वर्मा, राज्यसभा सांसद-झारखंड, भाजपा

भारत की आर्थिक यात्रा आज एक निर्णायक मोड़ पर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में देश ने पिछले एक दशक में जिस प्रकार पारदर्शिता, सुशासन और विकास के मार्ग पर कदम बढ़ाया है, उसमें वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) सुधार एक मील का पत्थर है। 2017 में जीएसटी की शुरुआत के बाद यह अब तक का सबसे बड़ा अप्रत्यक्ष कर सुधार है, जिसने न केवल कर प्रणाली को सरल बनाया बल्कि एक भारत, श्रेष्ठ भारत की परिकल्पना को भी आर्थिक आधार दिया।

हाल ही में केंद्रीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में आयोजित 56वीं जीएसटी परिषद की बैठक में जो अगली पीढ़ी के सुधार लागू किए गए हैं, वे न केवल कर संरचना को आसान बनाते हैं बल्कि आम आदमी, किसानों, मध्यम वर्ग, एमएसएमई और उद्योग जगत—सभी को नई ऊर्जा और राहत प्रदान करते हैं।

दो-स्लैब संरचना : पारदर्शिता और सरलता का नया युग

पहले जहां 5%, 12%, 18% और 28% की बहुस्तरीय व्यवस्था थी, अब उसे सिर्फ दो दरों – 5% और 18% में बदल दिया गया है। इससे कराधान का ढांचा अधिक पारदर्शी, न्यायसंगत और पालन में आसान होगा।

जीएसटी सुधारों ने घरेलू आवश्यक वस्तुओं (साबुन, टूथपेस्ट, भारतीय ब्रेड) पर कर घटाकर 5% या  शून्य कर दिया, जिससे सामर्थ्य में वृद्धि हुई

जीवन रक्षक दवाओं की कीमतें 12% से घटाकर शून्य या 5% कर दी गईं , जिससे स्वास्थ्य सेवा सस्ती हो गई

दोपहिया वाहन, छोटी कारें, टीवी, एसी, सीमेंट पर कर 28% से घटाकर 18% कर दिया गया , जिससे मध्यम वर्ग को राहत मिली।

कृषि मशीनरी और सिंचाई उपकरणों पर कर 12% से घटाकर 5% किया गया , जिससे कृषि लागत में कमी आई।

ये परिवर्तन केवल आंकड़ों में कमी नहीं हैं, बल्कि मध्यम वर्ग के घरों की बचत, किसानों की उत्पादन लागत में कमी, और छोटे उद्योगों की प्रतिस्पर्धा क्षमता में वृद्धि के प्रत्यक्ष उपाय हैं।

सामाजिक दृष्टि से महत्वपूर्ण सुधार

भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की विचारधारा हमेशा से समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति के कल्याण पर केंद्रित रही है। यही दृष्टिकोण इन सुधारों में परिलक्षित होता है-

शिक्षा : किताबों, पेंसिल, क्रेयॉन्स, शार्पनर और ज्योमेट्री बॉक्स जैसी वस्तुएं अब शून्य या 5% जीएसटी पर मिलेंगी। इससे गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के बच्चों की पढ़ाई सस्ती होगी।

स्वास्थ्य : दवाओं और मेडिकल उपकरणों पर दरों में कटौती से स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच आसान होगी। जीवन बीमा और स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम पर जीएसटी छूट ने हर परिवार को सुरक्षा कवच प्रदान किया है।

कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था : कम दरों पर कृषि मशीनरी, जैविक कीटनाशक और मधुमक्खी पालन उपकरण मिलने से किसानों की लागत घटेगी और आत्मनिर्भर खेती को बल मिलेगा।

कला और संस्कृति : हस्तशिल्प, मूर्तियां, खिलौने और लोककला पर कर दरें घटाकर 5% की गई हैं। इससे ग्रामीण कारीगरों और परंपरागत कलाकारों की आजीविका सुरक्षित होगी और भारत की सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षण मिलेगा।

आर्थिक विकास का बहुगुणक प्रभाव

जीएसटी सुधार केवल कर घटाने का कदम नहीं है। यह विकास का गुणक तंत्र है—

कम कीमतें → अधिक मांग → बढ़ी हुई खपत

खपत में वृद्धि → उद्योगों का उत्पादन तेज़ → रोज़गार के अवसर

उद्योगों की मजबूती → सरकार की राजस्व वृद्धि → सामाजिक योजनाओं में निवेश

पिछले वर्षों में देखा गया है कि कम दरों और बेहतर अनुपालन से राजस्व वसूली में वृद्धि हुई है। औसत मासिक संग्रह 2017-18 के ₹82,000 करोड़ से बढ़कर ₹2.04 लाख करोड़ हो गया है। करदाताओं का दायरा 66.5 लाख से बढ़कर 1.51 करोड़ तक जा पहुँचा। यह न केवल आर्थिक औपचारिकता को बढ़ाता है, बल्कि देश की वित्तीय नींव को भी मजबूत करता है।

झारखंड के संदर्भ में लाभ

झारखंड एक खनिज-समृद्ध, औद्योगिक और साथ ही कृषि-प्रधान राज्य है। यहां मध्यम वर्ग, मजदूर, किसान और छोटे व्यापारी बड़ी संख्या में रहते हैं। नई जीएसटी संरचना से—

निर्माण सामग्री और सीमेंट सस्ते होने से आवासीय योजनाओं और ग्रामीण बुनियादी ढांचे को गति मिलेगी।

कृषि उपकरण सस्ते होने से झारखंड के छोटे किसान लाभान्वित होंगे और पानी-बचत वाली सिंचाई प्रणालियां लोकप्रिय होंगी।

छोटे उद्योगों, स्टार्टअप्स और हस्तशिल्प कारीगरों को प्रतिस्पर्धात्मक लाभ मिलेगा।

स्वास्थ्य और शिक्षा सेवाओं की लागत घटने से ग्रामीण और आदिवासी परिवारों की जेब पर बोझ कम होगा।

झारखंड भाजपा का संकल्प है कि इन सुधारों को राज्य के हर नागरिक तक पहुंचाया जाए, ताकि ‘सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास’की नीति साकार हो।

राजनीतिक और वैचारिक दृष्टिकोण

भारतीय जनता पार्टी और आरएसएस की दृष्टि हमेशा ‘राष्ट्र प्रथम, समाज सर्वोपरि’ रही है। जीएसटी सुधार इसी दिशा में एक ठोस कदम है।

यह सुधार मध्यम वर्ग और गरीब परिवारों को राहत देता है, जो भाजपा की समाज-केन्द्रित राजनीति का मूल है।

यह सुधार किसानों और कारीगरों को सम्मानजनक जीवन देता है, जो आत्मनिर्भर भारत का आधार है।

यह सुधार औद्योगिक विकास और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को बढ़ाता है, जिससे भारत ‘विश्वगुरु’ बनने की ओर अग्रसर होता है।

प्रधानमंत्री मोदी जी ने स्वतंत्रता दिवस पर कहा था—“यह आपके लिए दिवाली का तोहफा है।” वास्तव में, यह केवल कर कटौती नहीं बल्कि आर्थिक स्वतंत्रता का पर्व है।

चुनौतियां और आगे की राह

निस्संदेह, सुधारों की सफलता तभी सुनिश्चित होगी जब—

  1. राज्यों को राजस्व का संतुलन बनाए रखने के लिए पर्याप्त सहयोग मिले।
  2. डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए छोटे व्यापारियों को कर अनुपालन में सरलता हो।
  3. उपभोक्ताओं को तत्काल राहत सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी निगरानी तंत्र हो।

भाजपा झारखंड और मैं स्वयं, राज्यसभा सांसद के रूप में, यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं कि ये सुधार झारखंड की धरती पर वास्तविक परिवर्तन लेकर आएं।

निष्कर्ष

जीएसटी सुधार 2025 केवल कर प्रणाली का सरलीकरण नहीं है, बल्कि यह नए भारत की आर्थिक क्रांति है। इससे जहां गरीब और मध्यम वर्ग को राहत मिली है, वहीं किसानों, छोटे उद्योगों और कारीगरों को भी नई दिशा मिली है।

यह सुधार भारत की आत्मनिर्भरता की यात्रा को गति देगा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के ‘विकसित भारत 2047’ के संकल्प को साकार करने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगा।

झारखंड की जनता और पूरे भारत को यह भरोसा होना चाहिए कि भाजपा की नीतियां सदैव समाजहित और राष्ट्रहित के लिए समर्पित हैं।

डॉ. प्रदीप कुमार वर्मा

राज्यसभा सांसद- झारखंड,भाजपा

प्रदेश महामंत्री, भाजपा झारखंड

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